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संबंध में एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है। बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा पर सख्त कार्रवाई हाल के दिनों में देखा गया है कि कई बुजुर्ग माता-पिता को उनके अपने ही बच्चे संपत्ति प्राप्त करने के बाद छोड़ देते हैं, जिससे वे अस्पतालों में सहारा खोजने को मजबूर हो जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल अमानवीय है बल्कि पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 का उपयोग इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23 लागू करने का निर्णय लिया है।
इस धारा के तहत, यदि बच्चे संपत्ति हासिल करने के बाद माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, तो संपत्ति के हस्तांतरण को रद्द किया जा सकता है और माता-पिता को उनका अधिकार वापस दिलाया जा सकता है। यदि माता-पिता स्वयं मामला दायर करने में असमर्थ होते हैं, तो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत कोई भी सामाजिक संगठन उनकी ओर से कानूनी कार्रवाई कर सकता है। सरकार का सख्त रुख सरकार ने सभी स्वायत्तशासी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों की निगरानी करें और रिपोर्ट करें। हाल ही में एक समीक्षा बैठक के दौरान, बीआईएमएस (BIMS) के निदेशक ने इस मुद्दे को चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास मंत्री शरण