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और वहां उन्हें मुफ्त शराब, मुफ्त एंट्री और डांस पार्टी का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। इन कसीनो में रातोंरात अमीर बनने के सपने लेकर पहुंचे युवा कुछ ही दिनों में कंगाल हो जाते हैं। कई घटनाओं में सामने आया है कि जब इन युवाओं के पास पैसे खत्म हो जाते हैं तो एजेन्ट खोरो के इशारों पर कसीनो प्रबंधन उन्हें उधार में भी रकम दे देता है ताकि उनकी लत बरकरार रहे। कर्ज में डूबते-डूबते कई युवा अवसाद में चले गए हैं और कुछ ने अपनी जान तक दे दी और कुछ ने पारिवारिक कारोबार तक दांव पर लगा दिए। कई उद्योगपति परिवारों में इस मुद्दे को लेकर तनाव और परिवार बिखराव की खबरें भी सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि चंपावत के निवर्तमान एसपी देवेंद्र पिंचा ने कुछ समय पहले भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती बरतते हुए ₹25,000 से अधिक नकद राशि नेपाल ले जाने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके अलावा बनबसा बॉर्डर
पर पुलिस ने कई बार ऐसे वाहनों को भी सीज़ किया जो रुद्रपुर और आसपास के इलाकों से युवाओं को लेकर नेपाल जा रहे थे। पुलिस ने इन पर जुर्माना भी लगाया और चेतावनी दी। फिर भी एजेंटों के नेटवर्क इतने मजबूत हैं कि वे नए-नए रास्ते और तरकीबें निकालकर युवाओं को नेपाल के कसीनो तक पहुंचा ही देते हैं। रुद्रपुर और काशीपुर के कई बड़े उद्योगपति परिवार अभी दबी जुबान में इस समस्या पर बोलने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क को न तोड़ा गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। एक उद्योगपति पिता ने बताया, "मेरा बेटा पढ़ा-लिखा और समझदार था। हमें लगा था कि वह कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, लेकिन जुए और सट्टेबाजी ने सब कुछ तबाह कर दिया। हमने अपनी जिंदगी की पूरी जमा पूंजी उसके कर्ज उतारने में लगा दी। अब भी डर लगता है कि वह फिर से