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पुलिस छापामार कार्रवाई में अपना हथियार बना रही थी, वही बड़ा खेल खेल रहे थे। वहां लोगों औऱ तस्करों को छोड़ने के एवज में पैसे लिए जा रहे थे। हालांकि पिछले दिनों उधम सिंह नगर पुलिस की कार्रवाई के बाद खुद बरेली जिले के कप्तान ने बताया था कि फतेहगंज पश्चिमी में एनडीपीएस के तहत 175 से ज्यादा एफआईआर पूरे साल में दर्ज कराई गई और 200 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया, लेकिन कुछ ही दिन बाद चौकी इंचार्ज का असली चेहरा सामने आ गया। पता लगा है कि चौकी इंचार्ज बलवीर सिंह और सिपाहियों ने लोगों से वसूली के लिए बंद पड़ी रबर फैक्ट्री के कंडम घोषित हो चुके आवासों को अवैध हवालात बना रखा था। किसी भी व्यक्ति को पकड़ने के बाद वहां लाया जाता और फिर वसूली की जाती। अब एसएसपी अनुराग आर्य की कड़ी कार्रवाई के बाद लोगों ने चौकी
इंचार्ज बलबीर सिंह के भ्रष्टाचार के बारे में बोलना शुरू कर दिया है। लोगों ने बताया है कि चौकी इंचार्ज और सिपाही चेकिंग के नाम पर घरों में घुसकर लोगों को उठा लाते थे और फिर उन्हें थाने ले जाने के वजाय बंद रबर फैक्ट्री के आवास में बनी हवालात में रखकर डील की जाती थी। तीन दिन पहले भी इन लोगों ने दो तस्करों को उठाया था, इनमें से एक तस्कर को जेल भेज दिया गया लेकिन दूसरे को 3 दिन तक बैठाए रखा। वे लोग उस पर बड़े तस्कर का नाम लेकर वसूली की कोशिश में थे, लेकिन मामला अफसरो के संज्ञान में आने पर उसे जेल भेजना पड़ा। आपको बता दें कि फतेहगंज पश्चिमी स्मैक तस्करी के लिए बदनाम है। चर्चा है कि तस्करों से वसूली के लिए एक छुटभैया नेता को रखा गया है। वह तस्करों से वसूली करके रकम पुलिस तक