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अधिकारियों के साथ बैठक कर इस व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सेंसर और सायरन की नियमित जांच करने के साथ ही जरूरत के अनुसार नए सेंसर और सायरन लगाने के निर्देश दिए हैं। यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से अतिरिक्त सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। 6 अक्टूबर के भूकंप में भी काम आया सिस्टम 6 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:23 बजे चमोली जिले के थराली के पास 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र करीब 13 किलोमीटर की गहराई में बताया गया। इस दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली ने काम किया और भूकंपीय तरंगों के लोगों तक पहुंचने से पहले चेतावनी जारी की गई। लोगों को भूदेव मोबाइल ऐप और लगाए गए सायरन के जरिए अलर्ट किया गया। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, अचानक आने वाली आपदा में मिलने
वाले कुछ सेकंड भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान लोग सुरक्षित स्थान पर जा सकते हैं और गैस या बिजली के उपकरण बंद करने जैसे जरूरी कदम उठा सकते हैं। हर महीने टेस्ट से लोगों को सायरन की आवाज की होगी पहचान सरकार के मुताबिक, मासिक सायरन टेस्ट का एक प्रमुख उद्देश्य लोगों को भूकंप चेतावनी की आवाज से परिचित कराना है। आमतौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकंप से पहले चेतावनी मिलने पर सायरन कैसा सुनाई देगा। ऐसे में आपदा के समय भ्रम और घबराहट की स्थिति पैदा हो सकती है। नियमित परीक्षण के जरिए लोगों को सायरन की आवाज पहचानने में मदद मिलेगी, ताकि वास्तविक खतरे के समय वे बिना घबराए तेजी से जरूरी कदम उठा सकें। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सतर्क और आपदा के लिए तैयार करना है।