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इसके बावजूद कथित रूप से फर्जी अभिलेख तैयार कर विलेख संख्या 8614/2025 और 8615/2025 के माध्यम से रजिस्ट्री करा ली गई। पीएसीएल और गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ा मामला प्राथमिक जांच में सामने आया है कि संबंधित भूमि Pearls Agrotech Corporation Limited (पीएसीएल) से जुड़ी प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। इसके अलावा भूमि का संबंध कथित रूप से Golden Forest India Limited की परिसंपत्तियों से भी बताया जा रहा है, जिन पर पूर्व से विभिन्न स्तरों पर प्रतिबंध लागू हैं। जांच में यह भी पाया गया कि विक्रेता
ने भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर रजिस्ट्री कराई, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। रजिस्ट्रार और एसडीएम को जांच के निर्देश डीएम के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून और एसडीएम सदर को संबंधित विलेखों की दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। यदि इन दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज के आदेश जारी किए गए हैं, तो उन्हें तत्काल निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत कूट रचना कर पंजीकरण कराने के मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा