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कानूनी कदम उठाए जा सकें। सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने दलील दी कि वायरल वीडियो के जरिए याचिकाकर्ता की छवि को जानबूझकर धूमिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस दुष्प्रचार में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट भी शामिल हैं। भाटिया ने कोर्ट को बताया कि अंकिता भंडारी मामले की जांच और ट्रायल के दौरान कहीं भी दुष्यंत गौतम का नाम सामने नहीं आया है, इसके बावजूद उन्हें झूठे आरोपों के जरिए बदनाम किया जा रहा है। अधिवक्ता ने कहा कि दुष्यंत गौतम पिछले पांच वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और इस तरह के वीडियो के कारण उन्हें अपूरणीय सामाजिक और राजनीतिक क्षति हुई
है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। दुष्यंत गौतम ने अपनी याचिका में कहा था कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया गया, जिसमें उनके खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़कर उन्हें अंकिता भंडारी मामले से जोड़ा गया। याचिका में यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियों ने कभी भी इस मामले में उनका नाम नहीं लिया और सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान फेक न्यूज की श्रेणी में आता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना है। गौरतलब है कि इस ताजा वीडियो को लेकर उत्तराखंड पुलिस पहले ही उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ दुष्प्रचार के आरोप में कई एफआईआर दर्ज कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के