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“निलेश राठौड़ की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उन्होंने एक बच्चे को ‘बेटा’ कह दिया था। जातिवादी सोच के लोगों ने उन्हें बेरहमी से पीटा। हम मांग करते हैं कि पीड़ित परिवार और उनके साथ मार झेलने वाले तीन अन्य लोगों को 5 एकड़ जमीन या सरकारी नौकरी दी जाए, जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से हो और केस फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चले।” कैसे हुआ हमला? 16 मई को अमरेली-सावरकुंडला रोड पर निलेश राठौड़ अपने साथियों के साथ एक भजिया स्टॉल के पास खड़े थे। वे पास की दुकान से स्नैक्स लेने गए, जहां उन्होंने दुकानदार के बेटे से कहा, “बेटा, क्या तुम्हें ऊपर से पैकेट निकालने में मदद चाहिए?” इस बात पर दुकानदार भड़क गया और राठौड़
पर लोहे की कड़छी से हमला करने की कोशिश की। जानलेवा हमला और जातिसूचक गालियां मामला समझाने के लिए लालजी मंसुख चौहान दुकान पर पहुंचे, लेकिन वहां भी दुकानदार ने उन पर डंडे से हमला कर दिया। एफआईआर के मुताबिक, विजय आनंद टोता नामक व्यक्ति ने भी हमला किया। बाद में दुकानदार ने अन्य लोगों को बुलाया और निलेश राठौड़, उनके चाचा सुरेश व अन्य लोगों पर डंडों और हसियों से हमला किया गया। साथ ही जातिसूचक गालियां भी दी गईं। हमलावरों ने पीछा करते हुए कहा, “नीची जाति के होकर ऊपर उठने की कोशिश कर रहे हो।” हमले को एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीच-बचाव कर रोका। एफआईआर में गंभीर धाराएं अमरेली ग्रामीण थाने में दर्ज एफआईआर में