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बताया कि शाह की ओर से पहले के आदेश के खिलाफ एक नई SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल की गई है और मंत्री ने माफी भी मांगी है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने तीखा सवाल दागते हुए पूछा, “माफी कहां है और कैसी है?” उन्होंने कहा, “माफी शब्द का भी एक मतलब होता है। कई बार लोग सिर्फ कानूनी मुश्किल से बचने के लिए दिखावटी तौर पर माफी मांगते हैं – जैसे मगरमच्छ के आंसू बहाना। हम देखना चाहते हैं कि आपने किस भावना से माफी मांगी है।” कोर्ट की नाराजगी – Armed Forces का सम्मान जरूरी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि मंत्री ने बिना सोचे-समझे बयान
दिया और अब केवल गिरफ्तारी से बचने के लिए माफी मांग रहे हैं। जस्टिस कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आप यह सोच रहे हैं कि कोर्ट में आकर माफी मांग लेना काफी है? आपने ईमानदारी से माफी क्यों नहीं मांगी? क्या यही आपका रवैया है?” उन्होंने एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि “एक व्यक्ति गुस्से में था लेकिन उसने खुद को नियंत्रित किया। सेना से जुड़ी किसी भी टिप्पणी में बेहद जिम्मेदारी की ज़रूरत होती है। पूरा देश शर्मिंदा है।” एसआईटी को सौंपी गई जांच, अगली सुनवाई 28 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR की जांच SIT को सौंपने के आदेश