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में उठा मामला मामला सूचना आयोग में दायर एक अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया। अपीलकर्ता संजीव चतुर्वेदी ने सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण से जुड़ी जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। हालांकि, संबंधित विभाग ने इसे 'निजी सूचना' बताते हुए उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। आयोग ने बताया विरोधाभासी रवैया सुनवाई के दौरान सूचना आयोग ने कहा कि जब सरकार अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों के फैसले लेती है, तो उन्हें जनहित में लिया गया प्रशासनिक निर्णय बताया जाता
है। लेकिन जब उन्हीं फैसलों से संबंधित जानकारी आरटीआई के तहत मांगी जाती है, तो उसे निजी सूचना बताकर देने से इनकार कर दिया जाता है। आयोग ने इस रवैये को परस्पर विरोधाभासी करार दिया। पारदर्शिता प्रशासन की आधारशिला सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मूल आवश्यकता है। सरकारी निर्णयों से जुड़ी सूचनाओं को केवल गोपनीयता का हवाला देकर अनावश्यक रूप से छिपाना उचित नहीं है। आयोग ने यह भी टिप्पणी