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को संबोधित किया। मातृशक्ति की भूमिका पर बोलते हुए वह भावुक हो गईं, जिससे पूरे पंडाल में संवेदनशील और भावनात्मक माहौल बन गया। गीता धामी ने अपने संबोधन में देश की वीरांगनाओं और माताओं के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी सफल व्यक्ति के पीछे उसकी मां और परिवार का बड़ा योगदान होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की माता विशना देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि उन्होंने परिवार को संभालने की जिम्मेदारी नहीं निभाई होती, तो आज मुख्यमंत्री इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने कहा कि बीते चार वर्षों में मुख्यमंत्री ने परिवार के लिए एक
दिन भी नहीं निकाला और लगातार प्रदेश की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हमेशा कठिन फैसले लेने का साहस दिखाया है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया और 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गईं। इसके बावजूद उन पर लगाए जा रहे आरोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं। गीता धामी ने समान नागरिक संहिता (UCC) और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को पहले ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट मान्यता दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कोई