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सोलर फेंसिंग लगाई जाएगी और आम लोगों को समय रहते सतर्क करने के लिए सेंसर आधारित अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इन सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आगामी दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी। सीएम धामी ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण न केवल लोगों की जान-माल को खतरा है, बल्कि खेती को भी भारी नुकसान हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जहां-जहां ऐसी घटनाएं अधिक सामने आ रही हैं, वहां सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि लंगूर, बंदर, सूअर और भालू सहित वन्यजीवों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रत्येक जिले में आधुनिक नसबंदी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। वन विभाग इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा चिन्हित जिलों में वन विभाग के नियंत्रण में रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर खोले जाएंगे। वर्तमान में रामनगर में टाइगर और गुलदार के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित है, जहां अब तक करीब 25 वन्यजीवों का रेस्क्यू किया जा चुका है। इसी तर्ज पर अन्य वन्यजीवों के लिए भी केंद्र बनाए जाएंगे। सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 10 नाली और मैदानी क्षेत्रों में एक