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इस मलखंभ प्रतियोगिता में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है। उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर खेलभूमि के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से इस बार के राष्ट्रीय खेलों का भव्य आयोजन हमारे प्रदेश में हो रहा है। इस आयोजन से ना केवल हमारे खिलाड़ियों को अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाने का अवसर मिल रहा है। बल्कि प्रदेश का स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी मज़बूत हुआ है। इसी क्रम में चकरपुर के इस स्टेडियम को 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से युक्त किया गया है। जो हमारे युवाओं को विभिन्न खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने में सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मुझे ये बताते हुए अत्यंत गर्व की अनुभूति हो रही है कि इस बार के राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाडियों ने अब तक 17 स्वर्ण
पदकों के साथ पहली बार 77 से अधिक मेडल लाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत के पारंपरिक खेलों को न केवल सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा है साथ ही उन्हें वैश्विक पहचान भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2036 के ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए भेजे गए प्रस्ताव में हमारे पारंपरिक खेलों जैसे कबड्डी, खो-खो और योग आदि को ओलंपिक में शामिल करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि उत्तराखंड में आयोजित हो रहे 38वें राष्ट्रीय खेलों में पहली बार योग और मलखंभ जैसे हमारे पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि मलखंभ केवल एक खेल नहीं बल्कि शारीरिक दक्षता, मानसिक