विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा कानून के तहत बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (PSP) यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर कोई एमडीआर नहीं वसूल सकते। प्रस्तावित संशोधन के बाद यह स्थायी छूट खत्म हो जाएगी। इसके बजाय केंद्र सरकार को यह अधिकार होगा कि वह समय-समय पर अधिसूचना जारी कर तय करे कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर एमडीआर शून्य रहेगा और किन पर शुल्क लगाया जाएगा। क्या होता है MDR? मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी (Merchant) से बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता वसूलते हैं। वर्तमान में: क्रेडिट कार्ड पर लगभग 1.5% तक MDR लगता है। डेबिट कार्ड पर करीब 0.9% तक MDR लागू होता है। UPI और RuPay Debit Card पर फिलहाल कोई MDR नहीं लिया
जाता। क्यों लाया जा रहा है यह बदलाव? डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जुलाई महीने में यूपीआई के जरिए 23.6 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं मिलने के कारण पेमेंट कंपनियों और बैंकों के लिए इस व्यवस्था में निवेश करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उनका तर्क है कि लंबे समय तक डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए राजस्व का स्रोत जरूरी है। किन लेनदेन पर लग सकता है चार्ज? सूत्रों के अनुसार, सरकार दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही है— एक निश्चित राशि से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाए। व्यापारियों के वार्षिक टर्नओवर के आधार पर शुल्क तय किया जाए। एक प्रस्ताव के मुताबिक,