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सरकार को आश्वासन दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर 10 मिनट डिलीवरी जैसे दावों से जुड़े विज्ञापन नहीं चलाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य कंपनियां भी इसी दिशा में कदम उठाएंगी। इस संबंध में श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने क्विक कॉमर्स सेक्टर में सक्रिय कंपनियों के अधिकारियों से चर्चा की थी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य गिग वर्कर्स की सुरक्षा, उनके बचाव और बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना है। यह मुद्दा संसद में भी उठ चुका है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने शीतकालीन सत्र के दौरान अत्यधिक तेज डिलीवरी की “मानवीय कीमत” पर सवाल उठाते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग की
थी। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने कंपनियों से डिलीवरी के लिए तय समय सीमा हटाने पर भी जोर दिया था। इसी क्रम में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट की वर्दी में नजर आए। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर, मैंने उनका दिन जिया।” उन्होंने कहा कि नीतिगत बहस से हटकर जमीनी हकीकत को समझना जरूरी है। Away from boardrooms, at the grassroots. I lived their day. Stay tuned! pic.twitter.com/exGBNFGD3T — Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 12, 2026 गौरतलब है कि नए साल से ठीक पहले गिग वर्कर्स की सुविधाओं को लेकर देशभर में बहस तेज हुई थी। इसके