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था। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद विमान अचानक लगभग 900 फीट तक तेजी से नीचे आ गया। इस दौरान कॉकपिट में 'स्टॉल वॉर्निंग', 'ग्राउंड प्रॉक्सिमिटी वॉर्निंग सिस्टम (GPWS)' और 'डोंट सिंक' अलर्ट एक्टिव हो गए। साथ ही 'स्टिक शेकर' अलार्म भी बजने लगा, जिससे पायलट को स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। पायलट्स ने समय रहते पाया नियंत्रण पायलट्स ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए विमान को स्थिर किया और तय ऊंचाई पर उड़ान जारी रखी। इसके बाद विमान ने बिना किसी और रुकावट के 9 घंटे 8 मिनट की यात्रा पूरी की और वियना में सुरक्षित लैंडिंग की। वहां से नया क्रू
आया और विमान को टोरंटो के लिए रवाना किया गया। पायलट्स की रिपोर्ट में छुपाई गई अहम जानकारी घटना के बाद पायलट्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि टेक-ऑफ के समय टर्बुलेंस के कारण स्टिक शेकर एक्टिव हुआ। लेकिन उन्होंने अन्य गंभीर चेतावनियों का कोई जिक्र नहीं किया। इस पर शक होने पर DGCA ने फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) की जांच कराई, जिसमें GPWS डोंट सिंक और स्टॉल वॉर्निंग जैसी गंभीर चेतावनियों की पुष्टि हुई। DGCA ने पायलट्स को ड्यूटी से हटाया एयर इंडिया की ओर से जारी बयान में कहा गया कि नियमों के तहत DGCA को तुरंत सूचना दी गई और विमान से