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हेमरेज की वजह से उनका निधन हो गया। दिसंबर 2022 में सशस्त्र बल न्यायाधीश की चंडीगढ़ पीठ ने सुमन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें विशेष पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि जवान अपनी मर्जी से छुट्टी पर गया था, इसलिए मृत्यु का सेवा से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। हाईकोर्ट का निर्णय:जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और विकास सूरी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि कानूनी दृष्टि से यह अंतर करना कि जवान एक्टिव ड्यूटी पर था या कैजुअल लीव पर, अप्रासंगिक है। मृत्यु
के समय सैनिक सेवा में था और कानून की नजर में छुट्टी पर गया जवान भी सैन्य अनुशासन और सेवा शर्तों के अधीन ही रहता है। सेना की नौकरी सामान्य नहीं:कोर्ट ने कहा कि सेना की नौकरी सामान्य नौकरियों जैसी नहीं है। कठिन भौगोलिक स्थितियों में पोस्टिंग, परिवार से दूर रहना और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन स्थितियां सैनिकों में उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव का कारण बनती हैं, जो सेरेब्रल हेमरेज जैसी स्थिति पैदा कर सकती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि भर्ती के समय सैनिक पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन सेवा के दौरान स्वास्थ्य पर असर पड़ा, इसलिए इसे सेवा परिस्थितियों से अलग नहीं माना