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आर्थिक प्रगति पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि बीते पांच वर्षों में राज्य के कैपिटल आउटले में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह राशि 7,534 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,765 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2.54 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। इसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। बजट-पूर्व संवाद के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने, सीवर लाइन और शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए रिक्त भूमि के उपयोग, जिला पंचायत सदस्यों के लिए मानदेय और अध्ययन भ्रमण की व्यवस्था जैसे सुझाव रखे गए। शहरी विकास से जुड़े सुझावों में नगर निकायों के बजट और संसाधनों में बढ़ोतरी,
पर्यावरण संरक्षण के लिए सोलर पैनल की स्थापना, सड़कों और नालियों के बेहतर रखरखाव तथा रजिस्ट्री शुल्क का आंशिक हिस्सा नगर निकायों को उपलब्ध कराने की मांग शामिल रही। कृषि और उद्यान क्षेत्र में बागवानी और वैल्यू क्रॉप को बढ़ावा देने, कीवी और ब्लूबेरी जैसे फलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, प्रोसेसिंग, तकनीकी प्रशिक्षण, दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को विशेष सहायता और फल उत्पादन सब्सिडी को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत किए जाने के सुझाव दिए गए। उद्योग विकास के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों में खाली भूमि पर उद्योग स्थापित कर स्थानीय रोजगार सृजन और पलायन रोकने, एमएसएमई को वित्तीय सहायता, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा और औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। महिला सशक्तिकरण को लेकर प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, महिलाओं को ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने और अस्पतालों की कैंटीन जैसी सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता से रोजगार देने के सुझाव