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बताया जा रहा है कि 2017 से 2020 तक तीन सालों का रोजगार सेवकों का पीएफ जमा ही नहीं किया गया था। इसको लेकर ईपीएफओ की ओर से मनरेगा विभाग को नोटिस जारी की गई थी, इसके बाद जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई है। देरी से जमा करने के कारण करीब 70 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति और जुर्माना लगाया है। समय से जमा होता ईपीएफ तो ब्याज का मिलता फायदा रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष गंगादीन कश्यप बताते हैं कि 2015 से 2020 तक ईपीएफ नहीं जमा किया गया। बाद में 2017 से 2020 तक ईपीएफ जमा कर दिया गया है। देरी से अंशदान जमा करने के मामले में यह कार्रवाई हुई है। समय से ईपीएफ जमा हो जाता तो रोजगार सेवकों को ब्याज के ताैर पर लाभ मिलता।ब्लॉकों में खुले होल्डिंग अकाउंट में सरकार ने 2015 से 2020 तक के ईपीएफ की 13 फीसदी रकम जमा कर दी है। रोजगार सेवकों ने
भी वर्ष 2017 से 2020 का ईपीएफ की 12 फीसदी धनराशि पिछले माह जमा कर दी है। कहा कि, पैसा नहीं होने की वजह से 2015 से 2017 का ईपीएफ अभी नहीं जमा हो सका है। डीसी मनरेगा मो. हसीब अंसारी ने बताया कि रोजगार सेवकों का ईपीएफ देरी से जमा करने के मामले में क्षतिपूर्ति और जुर्माना की कार्रवाई की गई है। मामला संज्ञान में आया है। प्रकरण को दिखवाया जा रहा है। उचित प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। एक साल से 776 रोजगार सेवकों का लटका मानदेय बकाया है सात करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान डीसी मनरेगा से मिले रोजगार सेवक, मिला आश्वासन एक साल से रोजगार सेवकों का मानदेय लटका हुआ है। इसकी वजह से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। शुक्रवार को रोजगार सेवकों ने विकास भवन में डीसी मनरेगा से मुलाकात की और मानदेय दिलाने की मांग उठाई। जिले में 776 रोजगार सेवक हैं। प्रत्येक को 7788 रुपये