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ग्रीष्मकालीन धान कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उधम सिंह नगर में करीब 20 से 22 हजार हेक्टेयर भूमि पर बेमौसमी धान की खेती हो रही थी, जिससे 15 हजार से अधिक किसान जुड़े हुए थे। धान ऐसी फसल है, जिसमें भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। बेमौसमी धान की सिंचाई के लिए लगातार नलकूपों से पानी निकालने के कारण जिले का भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया। इसके अलावा, बेमौसमी धान के बाद होने वाली मुख्य धान की फसल में रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया था, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। कृषि विभाग के कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. नवीन जोशी ने बताया कि पिछले वर्ष किसानों के अनुरोध पर कुछ शर्तों के साथ बेमौसमी धान की खेती
की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस बार इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई किसान बेमौसमी धान की खेती करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वैकल्पिक फसलों की सलाहबेमौसमी धान पर रोक के बाद किसानों की आय पर पड़ने वाले असर को देखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक फसलों के रूप में मक्का, गन्ना और पुदीना (मिंट) की खेती का सुझाव दिया है। कृषि विभाग किसानों को इन फसलों के प्रति जागरूक कर रहा है। फरवरी माह से किसानों को हाइब्रिड मक्का का बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष जिले में 6 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती हुई थी, जबकि इस बार 9 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती का लक्ष्य