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खुलने से पहले और उसके बाद 30 अप्रैल से 15 मई के बीच यात्रा पर आने वाले अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था बीकेटीसी की ओर से विभिन्न होटल, लॉज और जीएमवीएन के विश्राम गृहों में कराई गई थी। जांच में सामने आया कि इन व्यवस्थाओं से जुड़े बिलों का भुगतान करने से पहले वित्त अधिकारी और समिति अध्यक्ष की अनिवार्य स्वीकृति नहीं ली गई। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अपने स्तर पर मंजूरी देते हुए करीब छह लाख रुपये की अग्रिम भुगतान राशि जारी कर दी। RTI से खुला मामला, जांच में हुई पुष्टि यह मामला उस समय सुर्खियों में
आया जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद बीकेटीसी ने पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच कराई। जांच में वित्तीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन और अनियमितता की पुष्टि होने पर रिपोर्ट शासन को भेजी गई। पूर्व CEO समेत तीन अधिकारियों पर गिरी गाज शासन ने जांच रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल, मुख्य प्रभारी अधिकारी अनिल ध्यानी और केदारनाथ मंदिर के व्यवस्थापक अरविंद शुक्ला की भूमिका को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि