विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
नए कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना है। 2 महीने में जांच, 3 महीने में ट्रायल नए कानून के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। वहीं, चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट को रोजाना सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा। हर राज्य में बन सकेंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट संशोधित कानून के तहत सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट अधिसूचित कर सकें। इसके अलावा, इन मामलों की
प्रभावी पैरवी के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजकों (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति भी की जा सकेगी। दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान नए कानून के अनुसार, पेपर लीक कराने, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल होगी। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का भी प्रावधान कानून में केंद्र