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फांसी की सजा दी जाए और इस केस में शामिल कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक कर उसे भी कठोर सजा दी जाए। गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं यह ऐलान कर चुके थे कि सरकार अंकिता के माता-पिता की इच्छा के अनुरूप कार्रवाई करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा CBI जांच की संस्तुति से पहले ही किसी अन्य व्यक्ति की ओर से एफआईआर दर्ज करवाई गई, जिसके आधार पर CBI जांच कराने की बात कही जा रही है। इससे एक बार फिर संदेह पैदा होता है कि सरकार और मुख्यमंत्री धामी निष्पक्ष और पारदर्शी CBI जांच के बजाय जांच को भटकाने की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि 15 से 17 दिन बीत जाने के बावजूद यह अब तक स्पष्ट नहीं हो
सका है कि राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से CBI जांच की संस्तुति की है या नहीं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच से जुड़ा कोई भी नोटिफिकेशन अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। गणेश गोदियाल ने सरकार से मांग की कि CBI को भेजे गए प्रत्यावेदन को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार द्वारा भेजे गए पत्र में जांच के टर्म्स ऑफ रेफरेंस क्या हैं। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर मामले को एक हाइपोथेटिकल स्थिति में ले जाकर वास्तविक तथ्यों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। मामले की पृष्ठभूमि:वर्ष 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित