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हादसे में दर्दनाक मौत हो गई थी। शिवम आईटी से बी.टेक और एमबीए की पढ़ाई कर चुके थे और देहरादून में तीन फैक्ट्रियों का संचालन कर रहे थे। परिवार उनकी शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन अचानक हुए हादसे ने सब कुछ बदल दिया। बेटे की असमय मौत से टूट चुके जनार्दन सिंह ने बताया कि शिवम बेहद संवेदनशील और समझदार स्वभाव का था। बेटे का अंतिम संस्कार मणिकर्णिका घाट पर किया गया। वहां उन्होंने देखा कि मुस्लिम समुदाय को शव दफनाने के लिए कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही अनुभव उनके दिल को भीतर तक झकझोर गया और उन्होंने एक मानवीय निर्णय लिया। जनार्दन सिंह ने
गांव की एक बीघा जमीन मुस्लिम समाज को दान कर दी, ताकि वहां स्थायी कब्रिस्तान बनाया जा सके। उनका कहना है कि कोई भी इंसान अपने प्रिय को आखिरी विदाई देते समय परेशानी न झेले, यही उनके फैसले की वजह है। जनार्दन सिंह के छोटे भाई और शिवम के चाचा बृजनंदन सिंह ने बताया कि कब्रिस्तान के संचालन के लिए एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल होंगे। फिलहाल जमीन पर फसल लगी है, जिसकी कटाई के बाद मिलने वाली राशि भी कब्रिस्तान समिति को सौंप दी जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि अब उस जमीन पर परिवार का कोई अधिकार नहीं रहेगा।