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है कि यह बिल रूस की युद्ध शक्ति को कमजोर करने और पुतिन को यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत के लिए मजबूर करने का एक अहम हथियार है। क्या है इस बिल में? इस प्रस्तावित कानून के तहत उन देशों पर भारी आयात शुल्क लगाया जाएगा जो रूस से तेल या अन्य वस्तुओं की खरीददारी कर रहे हैं। ग्राहम के अनुसार, भारत और चीन मिलकर रूस के 70 फीसदी तेल का आयात करते हैं। अमेरिका चाहता है कि इस आर्थिक दबाव के जरिए ये देश रूस से व्यापार करना बंद करें। ग्राहम ने बताया कि बिल में राष्ट्रपति ट्रंप को विशेष अधिकार दिए जाएंगे, जिससे वह चाहें तो इस कानून को लागू करें या न करें। इस बिल को सीनेट में 84 सांसदों का समर्थन मिल चुका है। मार्च
में यह बिल पहली बार सामने आया था लेकिन उस समय व्हाइट हाउस की आपत्तियों और ट्रंप-पुतिन संबंधों को लेकर इसे रोक दिया गया था। अब ट्रंप खुद इसके समर्थन में आ चुके हैं। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद जब अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रूस से सस्ती दरों पर तेल खरीदना शुरू कर दिया। इसके लिए दोनों देशों ने डॉलर के बजाय रुपये-रूबल में व्यापार किया। इसका असर यह हुआ कि भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से बढ़कर 44% तक पहुंच गई। जून 2025 में भारत ने रूस से रोज़ाना 2-2.2 मिलियन बैरल तेल आयात करने की योजना बनाई है, जो अब तक का सबसे ज्यादा