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में चल रहे विचारों को पकड़कर शब्दों में बदला जा सकता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि बातचीत के दौरान न तो आपको हाथ-पैर हिलाने की ज़रूरत है और न ही चेहरे के भाव बदलने की। इस तकनीक को खासतौर पर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें बोलने में कठिनाई होती है, हालांकि इसे हर कोई इस्तेमाल कर सकता है। AlterEgo क्या है और कैसे काम करता है AlterEgo दिमाग में उठने वाले सूक्ष्म न्यूरल सिग्नल्स को पकड़ता है। जब कोई व्यक्ति सोचता है, तो उसके चेहरे और
गले की मांसपेशियों में हल्की हरकत होती है, जिसे आंखों से देख पाना संभव नहीं होता। यह डिवाइस उन संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर की भाषा में बदल देता है। इसके लिए शरीर में किसी भी डिवाइस को इम्प्लांट करने की आवश्यकता नहीं है। इससे इंसान बिना बोले AI, कंप्यूटर या किसी दूसरे व्यक्ति से प्राकृतिक भाषा में बात कर सकता है। अर्णव कपूर और प्रोजेक्ट का उद्देश्य अर्णव कपूर, भारतीय मूल के वैज्ञानिक, वर्तमान में कैम्ब्रिज में AlterEgo प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। वह इसे प्रोटोटाइप से एक कमर्शियल प्रोडक्ट में बदलने