विशेष फोटो - टुडे न्यूज़ 9
दशरथ माधे तुरंत गांव के सरपंच राजेंद्र गावंडे के पास मदद के लिए पहुंचे और भावुक होकर बोले, “साहब, सड़क नहीं है… अगर गाड़ी नहीं मिली तो मेरी पत्नी की जान को खतरा हो सकता है।” सरपंच ने तुरंत अपनी कार लेकर महिला को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हाल ही में हुई बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भर चुका था। बीच रास्ते में कार कीचड़ में फंस गई और इसी दौरान प्रतीक्षा की पीड़ा बढ़ गई। ग्रामीण महिलाओं ने निभाई दाई की भूमिका किसी अस्पताल या डॉक्टर की मदद के बिना प्रतीक्षा
को जंगल में ही प्रसव हुआ। उनकी सास, मां और गांव की एक महिला ने मिलकर कठिन परिस्थितियों में बच्चे का सुरक्षित जन्म करवाया। न डॉक्टर, न दवाई, न उपकरण — सिर्फ हिम्मत और अनुभव के बल पर ग्रामीण महिलाओं ने यह करिश्मा कर दिखाया। यह ग्रामीण महिलाओं की साहस और समझदारी का जीवंत उदाहरण है। प्रसव के बाद भी जारी रहा संघर्ष प्रसव के बाद गांव वालों ने कीचड़ में फंसी कार को किसी तरह बाहर निकाला। इस बीच सरपंच गावंडे ने स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर डॉ. सोनावणे से लगातार संपर्क बनाए रखा और एम्बुलेंस