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और अंततः उनकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। बेटे के जन्म के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है, मिठाई बांटी जा रही है और केक काटे जा रहे हैं। बेटे का नाम परिवार ने “दिलखुश” रखा है। संजय और सुनीता की शादी वर्ष 2007 में राजस्थान के भादरा में हुई थी। शादी के डेढ़ साल बाद उनकी पहली बेटी सरीना का जन्म हुआ। इसके बाद लगातार 10 बेटियों ने जन्म लिया। संजय ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटियों को भगवान का आशीर्वाद समझा और हमेशा से उनका यह मानना रहा कि बेटियों के लिए भी एक भाई होना
चाहिए। 19 साल बाद उनकी यह मन्नत पूरी हुई। उनकी बड़ी बेटी सरीना 12वीं कक्षा में पढ़ती हैं, जबकि दूसरी बेटी अमृता 11वीं में है। इसके बाद क्रमश: सुशीला (7वीं), किरण (6वीं), दिव्या (5वीं), मन्नत (3वीं), कृतिका (2वीं), अमनीश (1वीं), लक्ष्मी (9वीं) और वैशाली (10वीं) हैं। संजय की मां माया देवी पोते के जन्म से बेहद खुश हैं और उन्होंने कहा कि भगवान ने उनकी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। संजय पहले लोक निर्माण विभाग में डेली वेज पर काम करते थे, लेकिन 2018 में उनका कार्य समाप्त हो गया। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी कर परिवार