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पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई मुश्किलें रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में सालाना आधार पर 58 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 32.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल देखने को मिला। हालांकि जून में युद्धविराम के बाद कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन तेल आधारित पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स में इस्तेमाल होने वाले एल्किल बेंजीन जैसे कच्चे माल की कीमतें भी 12.4 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेलों की महंगाई भी बनी बड़ी चुनौती खाद्य तेलों की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक पाम ऑयल की कीमतें सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसकी बड़ी वजह इंडोनेशिया द्वारा
जुलाई 2026 से लागू किया जा रहा B50 बायोडीजल कार्यक्रम है, जिससे पाम ऑयल की वैश्विक मांग बढ़ गई है। इसके अलावा मुंबई बाजार में रिफाइंड सोयाबीन तेल की कीमतों में भी 20.7 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत और बढ़ गई है। चाय और दूध महंगे, कोको और कोपरा में राहत कृषि आधारित कच्चे माल में मिश्रित रुख देखने को मिला। प्रतिकूल मौसम और सीमित आपूर्ति के कारण चायपत्ती की थोक कीमतों में 3.8 प्रतिशत और दूध की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, बेहतर उत्पादन और आपूर्ति के चलते कोपरा की कीमतों में 25.8 प्रतिशत और कोको की कीमतों में 54.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे चॉकलेट और कन्फेक्शनरी उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। कमजोर रुपये ने बढ़ाई कंपनियों की लागत रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक