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पुनर्निर्माण, सड़कों, स्कूलों और राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत के लिए केंद्र का समर्थन। सड़क मरम्मत: लोक निर्माण विभाग को 457 करोड़ रुपये, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए एनएचएआई अलग से बजट देगा। आकलन: केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीमें नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं, जिसके आधार पर अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। आपदा का प्रभाव: 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक 79 लोगों की मौत, 115 घायल, 90 लापता, 3953 पशुओं की मृत्यु, 238 पक्के मकान पूरी तरह ध्वस्त, और हजारों मकान क्षतिग्रस्त। सत्ताधारी नेताओं की प्रतिक्रिया सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सहयोगी नेताओं ने इस पैकेज को त्वरित और संवेदनशील कदम बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग की सराहना की। पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड: "प्रधानमंत्री जी का उत्तराखंड आना और 1200 करोड़ रुपये का राहत पैकेज देना उनकी संवेदनशीलता और नेतृत्व का प्रमाण है। यह पैकेज प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में मददगार होगा। केंद्र-राज्य की यह साझेदारी आपदा प्रबंधन का नया मॉडल है।" त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री: "केंद्र और राज्य सरकार हर प्रभावित के साथ खड़ी है। 1200 करोड़ का पैकेज,
अनुग्रह राशि और पीएम केयर्स योजना के तहत अनाथ बच्चों की मदद सराहनीय है।" रीतु खंडूरी भूषण, विधानसभा स्पीकर: "प्रधानमंत्री की यह घोषणा उत्तराखंड के लिए बड़ा संबल है। प्रभावितों को तत्काल राहत और दीर्घकालिक मदद मिलेगी।" भाजपा उत्तराखंड (आधिकारिक): "यह पैकेज जनकल्याण और सुशासन की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के प्रयासों ने आपदा प्रबंधन को मजबूत किया है।" विपक्ष का तीखा हमला विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, यूकेडी और सीपीआई(एमएल) ने पैकेज को नाकافی बताते हुए केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। कई नेताओं ने 2013 की केदारनाथ त्रासदी से तुलना कर अधिक सहायता की मांग की। हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस: "1200 करोड़ का पैकेज ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। 2013 में मनमोहन सिंह सरकार ने 21,000 करोड़ रुपये दिए थे। आज नुकसान का दायरा बड़ा है, फिर भी केंद्र ने सौतेला व्यवहार किया। हमने 12,000 करोड़ की मांग की थी।" कर्ण माहरा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष: "उत्तराखंड को 20,000 करोड़ रुपये चाहिए। धामी सरकार ने केवल 5702 करोड़ मांगे, जो जोशीमठ जैसे क्षेत्रों के लिए भी