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में दर्ज किया गया था, जिसके तहत इसे कानूनी संरक्षण प्राप्त था। लेकिन अप्रैल 2025 की रात को स्थानीय प्रशासन ने इसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि न तो दरगाह के प्रबंधकों को कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर एक अवमानना याचिका दायर की गई। याचिका में दावा किया गया कि यह कार्रवाई वक्फ संशोधन विधेयक पर कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा, "वक्फ संपत्तियों को संरक्षित करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। इस तरह की एकतरफा कार्रवाई न केवल गैरकानूनी है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करती है।" सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
है। कोर्ट ने पूछा कि इस ध्वस्तीकरण का आधार क्या था और क्या इसके लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया गया। वक्फ संशोधन और कानूनी बहस यह मामला उस समय सामने आया है, जब वक्फ संशोधन विधेयक पर देशभर में बहस चल रही है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव करता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विधेयक पर विचाराधीन होने के दौरान ऐसी संपत्तियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। दरगाह का ध्वस्तीकरण इन निर्देशों के खिलाफ माना जा रहा है, जिसने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय समुदाय में नाराजगी दरगाह के ध्वस्त होने से देहरादून में खासकर मुस्लिम समुदाय में गहरी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दरगाह