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भरोसा कमजोर किया है। उनका कहना था कि परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रही है, जिसका सीधा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बावजूद यदि ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आती हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा
मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही NTA की कार्यप्रणाली की न्यायिक समीक्षा कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों एवं उनके परिवारों को न्याय दिलाने की मांग भी उठाई। नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने युवाओं से भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। जिला कांग्रेस महासचिव प्रदीप कुंवर ने आरोप लगाया